Friday, March 12, 2010

दुबारा विचारें

    एक सर्वे के अनुसार तीन वर्ष का बच्चा जब टी.वी. देखना शुरू करता है और उस घर में केबल कनैक्शन पर 12-13 चैनल आती हों तो, हर रोज पाँच घंटे के हिसाब से बालक 20 वर्ष का हो तब तक इसकी आँखें 33000 हत्या और 72000 बार अश्लीलता और बलात्कार के दृश्य देख चुकी होंगी।
        यहाँ एक बात गंभीरता से विचार करने की है कि मोहनदास करमचंद गाँधी नाम का एक छोटा सा बालक एक या दो बार हरिश्चन्द्र का नाटक देखकर सत्यवादी बन गया और वही बालक महात्मा गाँधी के नाम से आज भी पूजा जा रहा है। हरिश्चन्द्र का नाटक जब दिमाग पर इतनी असर करता है कि उस व्यक्ति को जिंदगी भर सत्य और अहिंसा का पालन करने वाला बना दिया, तो जो बालक 33 हजार बार हत्या और 72 हजार बार अश्लीलता का दृश्य देखेगा तो वह क्या बनेगा? आप भले झूठी आशा रखो कि आपका बच्चा इन्जीनियर बनेगा, वैज्ञानिक बनेगा, योग्य सज्जन बनेगा, महापुरूष बनेगा परन्तु इतनी बार अश्लीलता और इतनी हत्याएँ देखने वाला क्या खाक बनेगा? आप ही दुबारा विचारें।

2 comments:

Mahipal said...

जिसने भी यह बात कही है बिलकुल सही कही है ! मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ ! पर कर भी क्या सकते है आज हमारा समाज ही ऐसा बन गया है !

Mahipal said...

चलो हम सब मिल कर एक कदम उठाये , और अखिल भारतीय बिश्नोई युवा संगठन में हिसा ले !